शनिवार 3 अक्टूबर 2026 - 04:16
अक्ल अल्लाह की बड़ी नेमत है: मौलाना सय्यद वसी हैदर रिजवी

करीमपुर, कर्नाटक। इमाम-ए-जुमा करीमपुर मौलाना सैयद वसी हैदर रिजवी ने कहा कि अक्ल अल्लाह तआला की महान नेमत है, जिसके माध्यम से इंसान हक और बातिल, अच्छाई और बुराई तथा हलाल और हराम में अंतर करता है। मौजूदा दौर में, विशेष रूप से सोशल मीडिया पर फैलने वाली खबरों और वैश्विक परिस्थितियों के बारे में भावनाओं के बजाय शोध, सूझबूझ तथा ऐतिहासिक और जमीनी तथ्यों को ध्यान में रखना जरूरी है। उन्होंने उम्मत-ए-मुस्लिमा की एकता, दुनिया के मजलूमों के समर्थन तथा समाज में शांति और आपसी सहिष्णुता की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, करीमपुर, कर्नाटक में नमाज़-ए-जुमा के खुत्बे में मौलाना सैयद वसी हैदर रिजवी ने ‘अक्ल: अल्लाह तआला की महान नेमत और उसका सही इस्तेमाल’ विषय पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अल्लाह तआला ने इंसान को अनगिनत नेमतें प्रदान की हैं, लेकिन अक्ल उनमें एक अत्यंत महत्वपूर्ण नेमत है। अक्ल ही के माध्यम से इंसान हक और बातिल, अच्छाई और बुराई तथा हलाल और हराम में अंतर करता है।

उन्होंने कुरआन की आयत «إِنَّ شَرَّ الدَّوَابِّ عِندَ اللَّهِ الصُّمُّ الْبُكْمُ الَّذِينَ لَا يَعْقِلُونَ» का उल्लेख करते हुए कहा कि इस्लाम इंसान को चिंतन, मनन और अक्ल के सही इस्तेमाल की ओर आमंत्रित करता है। उन्होंने हदीस «الْعَقْلُ مَا عُبِدَ بِهِ الرَّحْمٰنُ وَاكْتُسِبَ بِهِ الْجِنَانُ» के हवाले से कहा कि वास्तविक अक्ल वही है, जो इंसान को अल्लाह की पहचान, इबादत और नेक कार्यों की ओर ले जाए।

मौलाना वसी हैदर रिजवी ने कहा कि मौजूदा दौर में सोशल मीडिया और दूसरे संचार माध्यमों के जरिए फैलने वाली खबरों को बिना जांच-पड़ताल आगे बढ़ाना उचित नहीं है। कुरआन हमें किसी खबर को स्वीकार करने से पहले उसकी जांच करने का निर्देश देता है। एक जागरूक मुसलमान को हर मामले में भावनाओं के साथ-साथ अक्ल, सूझबूझ और तथ्यों की जांच को भी ध्यान में रखना चाहिए।

गांधी जयंती के संदर्भ में

गांधी जयंती के अवसर पर उन्होंने महात्मा गांधी के जीवन के उस पहलू का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने अहिंसा, सत्य और आपसी सहिष्णुता पर जोर दिया था। मौलाना ने कहा कि समाज में शांति, इंसानों के आपसी सम्मान और मतभेदों के बावजूद एक-दूसरे के अधिकारों का ध्यान रखना एक सभ्य समाज की बुनियादी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि धर्म हमें अत्याचार से बचने, न्याय और इंसाफ कायम करने तथा मानव सम्मान की शिक्षा देता है।

मौजूदा हालात पर विचार

मौजूदा परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए इमाम-ए-जुमा करीमपुर ने मध्य पूर्व की स्थिति, इराक से अमेरिकी सैनिकों की वापसी और क्षेत्र में जारी प्रतिरोध के संघर्ष का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रतिरोध से जुड़े समूह अमेरिकी सैनिकों की वापसी को अपनी संघर्ष की सफलता और जीत के रूप में देख रहे हैं।

उन्होंने सैयद हसन नसरुल्लाह की दूसरी बरसी के संदर्भ में भी उनके योगदान और क्षेत्र की राजनीति तथा प्रतिरोध में उनकी भूमिका का उल्लेख किया। मौलाना ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को समझने के लिए भावनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक तथ्यों और जमीनी स्थिति का भी अध्ययन जरूरी है।

अंत में मौलाना सैयद वसी हैदर रिजवी ने उम्मत-ए-मुस्लिमा की एकता, दुनिया के मजलूमों के समर्थन, अत्याचार के अंत, आपसी सहिष्णुता तथा विश्व में शांति और स्थिरता के लिए दुआ की।

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